"चिकित्सा समाज सेवा है,व्यवसाय नहीं"

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Saturday, 29 July 2017

श्वांसों की लय और फेंफडों की खुराक

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Saturday, 27 May 2017

सहजन,अनारदाना,बेकिंग सोडा और खसखस द्वारा चिकित्सा .......................

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Monday, 22 May 2017

गुड और भुना चना,बेल,आम का औषद्धीय प्रयोग

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Saturday, 28 January 2017

कैंसर से दूर रहिए

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टोस्ट कम सेंकिए, कैंसर से दूर रहिए  :

ब्रेड, चिप्स और आलू को ज्यादा पकाने से बचिए. फूड वैज्ञानिकों के मुताबिक़ इससे कैंसर होने का खतरा है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि स्टार्च वाला खाना जब बहुत ज्यादा तापमान पर और ज्यादा देर तक सेंका, भुना, तला या ग्रिल किया जाता है तो उसमें एक्रिलामाइड नाम का रसायन पैदा होता है.
एक्रिलामाइड अलग अलग तरह के खाने में मौजूद होता है. और ये खाना बनाते समय स्वाभाविक रूप से पैदा होता है.
यह उन भोजन में सबसे अधिक पाया जाता है जिनमें शर्करा अधिक होता है और जो 120 डिग्री सेल्सियस तक पकाए जाते हैं. जैसे कि चिप्स, ब्रेड, सुबह नाश्ते की दालें, बिस्किट, क्रैक्स, केक और कॉफी.

दरअसल जब ब्रेड को हम टोस्ट करने के लिए ग्रिल करते हैं तो उसमें ज्यादा मात्रा में एक्रिलामाइड बनते हैं. टोस्ट का रंग जितना गहरा होगा उसमें उतनी अधिक मात्रा में एक्रिलामाइड बनेंगे.
ब्रेड जब भूरा होने लगता है तो उसमें मौजूद शर्करा, एमीनो एसिड और पानी मिलकर रंग और एक्रिलामाइड बनाते हैं. और इसी से सुगंध भी पैदा होती है.
फूड स्टैंडर्स एजेंसी (एफएसए) ने खाना बनाने से जुड़े निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करने और खाने को भूरा होने तक भुनने या पकाने से बचने की सलाह दी है.
हालांकि कैंसर रिसर्च से जुड़ी प्रवक्ता का कहना है कि गहरे लाल भुने खानों से कैंसर होने की पुष्टि अभी इंसानों में नहीं हुई है.

नमक कम कीजिए, कैंसर को 'दूर रखिए' :

जानवरों के साथ किए गए शोध बताते हैं कि यह रसायन डीनए के लिए विषैला होता है और इससे कैंसर पैदा करता है.
हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है पर वैज्ञानिकों ने इसे इंसानों के लिए भी हानिकारक माना है.
एक्रिलामाइड से कैंसर का खतरा होने के साथ साथ, तंत्रिका और प्रजनन तंत्र पर भी हानिकारक असर हो सकता है.
एफएसए ने ये भी चेतावनी दी है कि आलू को फ्रिज में ना रखें. क्योंकि कम तापमान में रहने से इसमें मौजूद शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है. फिर जब इसे पकाया जाता है तब उसमें हानिकारक एक्रिलामाइड पैदा होते हैं.



Thursday, 31 December 2015

निगेटिव एप्रोच, भ्रष्टाचार और कैंसर का इलाज

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विद्वान लेखक खुद ही लिख रहे हैं कि 22 लाख रुपए खर्च करके भी  वे बचे नहीं फिर निष्कर्ष दे रहे हैं " खूब भ्रष्टाचार करो और रुपया कमाओ। "

सबसे बड़ी बात तो यह है कि पाश्चात्य प्रभाव में 'मूल निवासी आंदोलन' के नाम पर 'चारों वेदों को भाड़ में झोंक दो' मुहिम चला कर इस देश की  जनता को गहरे गर्त में धकेला जा रहा है जिसका दुष्परिणाम अफरा-तफरी के रूप में सामने आ रहा है। 

'वेद' मानव सभ्यता के उद्भव के साथ मानवता के उत्थान के लिए बनाए गए नियम हैं जो 'प्रकृति 'के अनुसार' आचरण करना सिखाते हैं। प्रकृति के विपरीत चलने के कारण दुखों का अंबार खड़ा हो गया है जो किसी न किसी रूप में सामने आता रहता है। 

मनुष्य का प्राकृतिक  नाम 'कृतु' है अर्थात कर्म करने वाला। कर्म तीन प्रकार के होते हैं- सदकर्म, दुष्कर्म व अकर्म। सदकर्म का अच्छा , दुष्कर्म का बुरा  फल मिलता है व अकर्म का भी 'दंड' मिलता है। अकर्म वह कर्म होता है जो किया जाना चाहिए था परंतु किया नहीं गया था। 

जिन कर्मों का फल इस जन्म में नहीं मिल पाता है वे आगामी जन्म के लिए  आत्मा के साथ 'सूक्ष्म' रूप से चलने वाले कारण शरीर के 'चित्त' में 'गुप्त' रूप से अंकित होकर संचित रहते हैं। व्यक्ति के जन्म समय की ग्रह-दशा से इसका आंकलन हो जाता है। जब किसी के जन्म के समय लग्न, षष्ठम , अष्टम भाव में किसी से भी 'शनि' व 'मंगल' ग्रह  का परस्पर संबंध हो तो 'कैंसर' रोग होने के संकेत मिल जाते हैं। अब यदि इन ग्रहों का वैज्ञानिक विधि से ( पोंगा पंडितों की लुटेरी पद्धति से नहीं ) शमन हो जाये तो कैंसर रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है। 

आयु का विज्ञान आयुर्वेद  है जो 'अथर्व वेद' का उपवेद है। इसको 'पंचम वेद' भी कहा जाता है। इसकी एक चिकित्सा पद्धति में नौ जड़ी-बूटियों से ऋतु-परिवर्तन के समय सेवन करके शरीर को नीरोग रखने की व्यवस्था की गई थी। दुर्भाग्य यह है कि पौराणिक-पोंगा-पंडितों ने स्वास्थ्य -रक्षा की इस विधि को अपनी आजीविका हेतु शोषण व लूट का एक माध्यम बना कर नया स्वांग रच डाला और इसके शरीर-विज्ञान से संबन्धित महत्व को समाप्त कर डाला है। नवरात्र के नाम पर ढोंग-स्वांग तो सब लोग खुशी-खुशी कर लेते हैं किन्तु उसके वेदोक्त -वैज्ञानिक महत्व को 'एथीज़्म'/मूल निवासी आंदोलन आदि-आदि के नाम पर ठुकरा देते हैं। जब कर्मों का परिणाम सामने आता है तो दिग्भ्रमित होकर अर्थ का और अनर्थ करते रह कर पीड़ित व दुखी होते रहते हैं लुटेरों से लुटना पसंद करते हैं किन्तु 'सत्य' को स्वीकार करना नहीं। 

आज के भीषण रोगों 'कैंसर' का वर्णन 'रक्तबीज' और AIDS का 'कीलक' के रूप में किया गया था। उपचार और समाधान भी दिया गया था किन्तु क्या सवर्ण क्या अवर्ण, क्या दलित क्या पिछड़े सभी पोंगा-पंडितों के बताए ढोंग के रूप में 'नवरात्र' मना कर जीवन को नष्ट कर रहे हैं। वास्तविकता को समझ कर उपचार करना किसी के एजेंडे में शामिल नहीं है। फिर भी  जन साधारण की सेवा में एक बार पुनः प्रस्तुत है :



Wednesday, 13 May 2015

कसरत करें, ब्रेस्ट कैंसर से बचें --- Tauseef Qureshi

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कसरत करें, ब्रेस्ट कैंसर से बचें :
भारत में ब्रेस्ट कैंसर के आधे मामलों का अंत मौत में होता है. अमेरिका और चीन में भारत से कई गुना अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं लेकिन वक्त रहते इलाज मुमकिन होता है. ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।
भारत में स्तन कैंसर के मामलों में सबसे आगे है मुंबई. दूसरे नंबर पर है चेन्नई और उसके बाद बैंगलोर. यह बीमारी पिछले साल 70,000 से अधिक महिलाओं की मौत का कारण बनी. आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं जब तक इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करती हैं, तब तक कैंसर आखिरी स्टेज तक पहुंच चुका होता है. देश में हर 28 में से एक महिला को स्तन कैंसर है. बड़े शहरों की बात करें, तो यह संख्या 22 है.
ब्रेस्ट कैंसर के इतने मामलों के बावजूद इसके बारे में जागरुकता की भारी कमी है. स्तन कैंसर औसतन 50 साल की उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखा गया है. लेकिन चिंता की बात है कि यह उम्र अब घट कर 35 से 40 होती जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक जमाने की तेजी और पश्चिमी जीवनशैली इसके लिए जिम्मेदार हैं.
ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के मौके पर जर्मनी की कैंसर संस्था ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि कसरत के जरिए स्तन कैंसर को रोका जा सकता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि जो महिलाएं प्रतिदिन 30 से 60 मिनट कसरत करती हैं, उनमें कसरत ना करने वालों की तुलना में स्तन कैंसर का खतरा काफी कम होता है. बॉन स्थित इस गैर सरकारी संस्था ने रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि कसरत से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और वह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने के लिए भी तैयार हो जाता है.
रिपोर्ट तैयार करने के लिए कसरत करने वालों की जीवनशैली पर ध्यान दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार जो महिलाएं नियमित रूप से कसरत करती हैं, वे शराब और सिगरेट का कम सेवन करती हैं. इसके अलावा वे संतुलित आहार लेने पर भी ध्यान देती हैं. इसके विपरीत कसरत ना करने वाली महिलाओं की जीवनशैली काफी अस्वस्थ होती है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है और स्तन कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
वजन का ख्याल और नियमित व्यायाम
ब्रेस्ट कैंसर से बचने के 10 तरीके
वजन का ख्याल और नियमित व्यायाम
अपने शारीरिक भार को संतुलन में रखें. मोटापा अपने आप में एक बीमारी है और कई दूसरी बीमारियों को पैर पसारने का मौका भी देता है. हर दिन औसतन आधे से एक घंटा या फिर हफ्ते में कम से कम चार घंटे कसरत करने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है. नियमित व्यायाम से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता और मेटाबोलिज्म भी मजबूत होता है।

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ज्योतिषीय उपचार : 
कैंसर का कारण 'मंगल' और 'शनि'ग्रह होते हैं। किसी भी व्यक्ति के जन्म के समय यदि इन दोनों ग्रहों का परस्पर संबंध स्थापित होता है तो उस व्यक्ति को जीवन में कैंसर होने की संभावना रहती है। यदि शुरू से ही ज्ञात होने पर सतर्कता बरती जाये तो इससे बचाव संभव है। शरीर में कैंसर चाहे किसी भी अंग में हो चिकित्सा के साथ-साथ उसके लिए पश्चिम की ओर मुख करके और धरती से इंसुलेशन बनाते हुये (अर्थात लकड़ी, रेशम या पोलीथीन के आसन पर बैठ कर ) प्रतिदिन 108 बार इन मंत्रों का सस्वर पाठ करना चाहिए :
1)- ॐ अंग अंगारकाय नमः 
2)- ॐ शम शनेश्चराय नमः  
-----(विजय राजबली माथुर )

Sunday, 8 February 2015

चमत्कार देखें घरेलू चिकित्सा के

सेहत बनाएं:
यदि आप अपनी सेहत बनाने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले जरूरत है अपनी दिनचर्या सुधारने की। उसके लिए पेट साफ रखने की भी जरूरत है। पेट में कब्ज रहेगा तो कितने ही पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें, लाभ नहीं होगा।
भोजन समय पर तथा चबा-चबाकर खाना चाहिए, ताकि पाचन शक्ति ठीक बनी रहे, फिर पौष्टिक आहार या औषधि का सेवन करना चाहिए। आचार्य चरक ने कहा है कि पुरुष के शरीर में वीर्य तथा स्त्री के शरीर में ओज होना चाहिए, तभी चेहरे पर चमक व कांति नजर आती है और शरीर पुष्ट दिखता है।
हम यहाँ कुछ ऐसे पौष्टिक पदार्थों की जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें किशोरावस्था से लेकर युवावस्था तक के लोग सेवन कर लाभ उठा सकते हैं और बलवान बन सकते हैं-
सोते समय एक गिलास मीठे गुनगुने गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध घी डालकर पीना चाहिए।
दूध की मलाई तथा पिसी मिश्री जरूरत के अनुसार मिलाकर खाना चाहिए, यह अत्यंत शक्तिवर्द्धक है।
एक बादाम को पत्थर पर घिसकर दूध में मिलाकर पीना चाहिए, इससे अपार बल मिलता है। बादाम को घिसकर ही उपयोग में लें।
छाछ से निकाला गया ताजा माखन तथा मिश्री मिलाकर खाना चाहिए, ऊपर से पानी बिलकुल न पिएँ।
50 ग्राम उड़द की दाल आधा लीटर दूध में पकाकर खीर बनाकर खाने से अपार बल प्राप्त होता है। यह खीर पूरे शरीर को पुष्ट करती है।
प्रातः एक पाव दूध तथा दो-तीन केले साथ में खाने से बल मिलता है, कांति बढ़ती है।
एक चम्मच असगंध चूर्ण तथा एक चम्मच मिश्री मिलाकर गुनगुने एक पाव दूर के साथ प्रातः व रात को सेवन करें, रात को सेवन के बाद कुल्ला कर सो जाएँ। 40 दिन में परिवर्तन नजर आने लगेगा।
सफेद मूसली या धोली मूसली का पावडर, जो स्वयं कूटकर बनाया हो, एक चम्मच तथा पिसी मिश्री एक चम्मच लेकर सुबह व रात को सोने से पहले गुनगुने एक पाव दूध के साथ लें। यह अत्यंत शक्तिवर्धक है।
सुबह-शाम भोजन के बाद सेवफल, अनार, केले या जो भी मौसमी फल हों, खाएँ।
सुबह एक पाव ठंडे दूध में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून साफ होता है, शरीर में खून की वृद्धि होती है।
प्याज का रस 2 चम्मच, शहद 1 चम्मच, घी चौथाई चम्मच मिलाकर सेवन करें और स्वयं शक्ति का चमत्कार देखें। यह नुस्खा यौन शक्ति बढ़ाने में अचूक है।

Friday, 23 January 2015

अस्थमा व हृदयाघात से बचाव : शकरकंदी और परहेज

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सर्दियां शुरू हो चुकी हैं और इस मौसम में हमारे पास खाने-पीने के बहुत से विकल्प होते हैं। तो अपनी स्वाद ग्रंथियों को फलों व सब्जि़यों के सेवन का मौका दें। कुछ फल व सब्जि़यां तो ऐसी हैं, जिनका सेवन सिर्फ इसी मौसम में किया जा सकता है। ऐसी ही है शकरकंदी, जिसे अंग्रेजी में 'स्वीट पोटैटो' कहा जाता है।
• प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए : शकरकंदी में विटामिन बी कांप्ले़क्स, आयरन, फास्फोसरस, विटामिन सी, के अलावा बीटा कैरोटीन प्रचूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का काम करता है।
• अस्थमा से बचाव : शकरकंदी शरीर को गर्म भी रखती है और इसमें मौजूद विटामिन सी के सेवन से ब्रांकाइटिस और फेफड़ों की परेशानी में भी आराम मिलता है।
• अर्थराइटिस : शकरकंदी में मैग्नीशियम, जिंक, बीटा कैरोटीन और विटामिन बी कांप्लै्क्स होते हैं, इसलिए यह अर्थराइटिस के मरीज़ों के लिए अच्छा है।
• पाचन क्रिया : शकरकंदी स्वादिष्ट तो होती ही है, इसमें फाइबर भी अधिक मात्रा में होते हैं इसलिए यह पाचन तंत्र के लिए भी अच्छीं है।
• कैंसर : बीटा कैरोटीन को एण्टी्-कार्सिनोजन(कैंसर से राहत दिलाने वाला) माना जाता है। शकरकंदी प्रास्ट्रेंट, कोलन, आंत के कैंसर से शरीर की सुरक्षा करता है।
• हृदय स्वास्‍थ्‍य के लिए : अधिक मात्रा में पोटैशियम के सेवन से हृदयाघात और स्ट्रोाक का खतरा कम होता है और रक्तरचाप भी नियंत्रित रहता है।
• डायबिटीज़ : डायबिटिक्स की यह सोच बिलकुल गलत है कि वह शकरकंदी नहीं खा सकते। शकरकंदी के सेवन से रक्त़ में शर्करा का स्तपर ठीक रहता है और इन्सु‍लिन की मात्रा भी ठीक रहती है।
• वज़न प्रबंधन : शकरकंदी में प्रोटीन, स्टाऔर्च, विटामिन, मिनेरल्स। और प्रोटीन अच्छी मात्रा में होते हैं और यह शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। मोटापा घटाना चाहते हैं, तो भी आप शकरकंदी का सेवन कर सकते हैं।

Wednesday, 19 November 2014

काली मिर्च आदि से घरेलू इलाज और कैंसर












जैतून के तेल के लाभ
जैतून के तेल का प्रयोग शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। जैतून के तेल में फ्लेवसेनॉयड्‌स स्कवेलीन और पोरीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्‌स होता है जो फ्री रैडिकल्स से कोशिकाओं को समाप्त होने से बचाता है। सर्दियों और गर्मियों के मौसम में यह रूखी त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसका प्रयोग करने से बालों से डैंड्रफ समाप्त होता है। झुर्रियों को समाप्त करने के लिए यह बहुत उपयोगी है। शरीर के हर अंग में इस तेल का प्रयोग किया जा सकता है। खाने में इसे शामिल कर ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसे रोगों को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
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गाजर के सेवन से भी कैंसर को नियंत्रित किया जा सकता है। ज्योतिष के अनुसार किसी की जन्म कुंडली में 'शनि' व 'मंगल' ग्रह में परस्पर संबंध हो तो 'कैंसर' रोग होने सम्भावना रहती है।

*आगरा कालेज,आगरा के जूलाजी विभाग के अध्यक्ष रहे एक अवकाश प्राप्त सज्जन को 64 वर्ष की अवस्था मूत्र नली में कैंसर का डॉ को पता चला था ,वह पहले से ही डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर व हार्ट के मरीज थे। आपरेशन करवाने से घबरा रहे थे लेकिन ज्योतिष के अनुसार उनको शनि व मंगल ग्रहों के शमन का परामर्श दिया गया जिसका पालन उन्होने बखूबी किया फलतः उनका आपरेशन सफल रहा । लेकिन आपरेशन दिये गए समय पर करवाने में डॉ को राज़ी करना सरल काम नहीं था। जब डॉ आपरेशन करना चाहते थे समय उनके प्रतिकूल था उनको न करवाने का परामर्श दिया था। अनुकूल समय पर डॉ नहीं करते थे। अंततः जब ज्योतिष के अनुसार अनुकूल समय पर डॉ ने आपरेशन करना स्वीकार किया तभी उन्होने आपरेशन करवाया जो सफल हो सका जबकि डॉ सफलता की गारंटी नहीं दे रहे थे।
* अलीगढ़ स्थित एक मेडिकल रिप्रेंजनटेटिव की पत्नी को मस्तिष्क में कैंसर का पता चला था जिनके दो छोटे-छोटे बच्चे थे। उनके आगरा स्थित मित्र ने मुझसे संपर्क कर परामर्श मांगा और दी गई सलाह के अनुसार उपचार व आपरेशन करवाया गया जो पूर्ण रूप से सफल रहा जबकि वहाँ भी डॉ ने गारंटी नहीं दी थी।





काम के लिए
सर्दी-जुकाम होने पर दालचीनी का प्रयोग करना चाहिए। एक चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम लेने से खांसी-जुकाम में आराम मिलता है। हल्के गर्म पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर तथा एक चुटकी पिसी काली मिर्च शहद में मिलाकर पीने से जुकाम तथा गले की खराश दूर होती है। इसके पाउडर को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाने से ठंडी हवा से होने वाले सिर दर्द में आराम मिलता है।
- See more at: http://www.onlymyhealth.com/health-slideshow/health-benefits-of-dalchini-in-hindi-1385801960-2.html#sthash.C71UmzG4.dpuf
 

Thursday, 13 November 2014

दालचीनी के कुछ घरेलु प्रयोग ---Face Book

सामान्यत: दालचीनी मसालों के रूप में काम मे ली जाती है। लेकिन यह पेट रोग, इंफ्यूएंजा, टाइफाइड, टीबी और कैंसर जैसे रोगों में उपयोगी पाई गई है। दालचीनी का तेल बनता है। दालचीनी,साबुन, दांतों के मंजन, पेस्ट, चाकलेट, सुगंध व उत्तेजक के रूप में काम में आती है। चाय, काफी में दालचीनी डालकर पीने से स्वादिष्ट हो जाती है तथा जुकाम भी ठीक हो जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं दालचीनी के कुछ घरेलु प्रयोग जो बहुत उपयोगी हैं।

- दालचीनी का तेल दर्द, घावों और सूजन को नष्ट करता है।

- दालचीनी को तिल के तेल, पानी, शहद में मिलाकर उपयोग करना चाहिए। दर्द वाले स्थान पर मालिश करने के बाद इसे रातभर रहने देते है। मालिश अगर दिन में करें तो 2-3 घंटे के बाद धोएं।

- दालचीनी त्वचा को निखारती है तथा खुजली के रोग को दूर करती है।

- दालचीनी सेहत के लिए लाभकारी है। यह पाचक रसों के स्त्राव को भी उत्तेजित करती है। दांतों की समस्याओं को दूर करने में भी यह उपयोगी है।

- रात को सोते समय नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी पाउडर शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।

- दालचीनी का नियमित प्रयोग मौसमी बीमारियों को दूर रखता है।

- ठंडी हवा से होने वाले सिरदर्द से राहत पाने के लिए दालचीनी के पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएं।

- दालचीनी पाउडर में नीबू का रस मिलाकर लगाने से मुंहासे व ब्लैकहैड्स दूर होते हैं।

- दालचीनी, डायरिया व जी मिचलाने में भी औषधी के रूप में काम में लाई जाती है।

- मुंह से बदबू आने पर दालचीनी का छोटा टुकड़ा चूसें। यह एक अच्छी माउथ फ्रेशनर भी है।

- दालचीनी में एंटीएजिंग तत्त्व उपस्थित होते हैं। एक नीबू के रस में दो बड़े चम्मच जैतून का तेल, एक कप चीनी, आधा कप दूध, दो चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पांच मिनट के लिए शरीर पर लगाएं। इसके बाद नहा लें, त्वचा खिल उठेगी।

- दालचीनी पाउडर की तीन ग्राम मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ लेने पर दस्त बंद हो जाते हैं

- आर्थराइटिस का दर्द दूर भगाने में शहद और दालचीनी का मिश्रण बड़ा कारगर है।

-गंजेपन या बालों के गिरने की समस्या बेहद आम है। इससे छुटकारा पाने के लिए गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। इसे सिर में लगाए और पंद्रह मिनट बाद धो लें।

- एक चम्मच दालचीनी पाउडर और पांच चम्मच शहद मिलाकर बनाए गए पेस्ट को दांत के दर्द वाली जगह पर लगाने से फौरन राहत मिलती है।

- सर्दी जुकाम हो तो एक चम्मच शहद में एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में तीन बार खाएं। पुराने कफ और सर्दी में भी राहत मिलेगी।

- पेट का दर्द-शहद के साथ दालचीनी पाउडर लेने पर पेट के दर्द से राहत मिलती है।

- खाली पेट रोजाना सुबह एक कप गरम पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से फैट कम होता है। इससे मोटे से मोटा व्यक्ति भी दुबला हो जाता है।